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Thursday, 1 September 2016

धर्म v/s विज्ञान

धर्म और विज्ञान, क्या ये दोनों अलग-अलग विषय हैं? क्या जहाँ धर्म है, वहाँ विज्ञान की कोई भी बात मायने नहीं रखती है और जहाँ विज्ञान है, वहाँ धर्म का कोई स्थान नहीं। बहुत से लोगों का यह मानना है कि जहाँ पर विज्ञान जाकर खत्म होता है, वहीं से धर्म की शुरूआत होती है। उनका ये भी मानना है कि जो बातें विज्ञान के द्वारा पता नहीं की जा सकती, वो धर्म के द्वारा पता की जा सकती हैं। लेकिन सत्य तो बिल्कुल ही इसके विपरीत है। धर्म और विज्ञान परस्पर एक दूसरे से जुड़े हुए हैं। धर्म का ये मतलब तो कतई नहीं की हम किसी विशिष्ट देवता को ही माने या फिर उनकी पूजा करें, हाँ ये हमारे रचयिता के प्रति आस्था को जरूर प्रकट करता है। धर्म तो इस संसार व यहाँ के लोगों को जानने व समझने का एक जरिया मात्र है और विज्ञान के द्वारा भी हम लगभग यही पता करते हैं। फिर पता नहीं ये दोनों अलग कैसे हो गए।
         
         आज का जो समय है, वहाँ के लोगों ने ही इसे अलग-अलग कर दिया है और तो और उन्होंने धर्म का भी बँटवारा कर दिया कि ये धर्म मेरा है और ये धर्म तुम्हारा है। इनकी पूजा हम करेंगे और इनकी तुम। इस समय लोग धर्म का प्रयोग ज्ञान के लिए नहीं कर रहे, बल्कि वो तो इसे लड़ाईयों व भेदभाव का आधार बना रहे हैं। धर्म जो कि मनुष्य व समाज के विकास में सहायक होना चाहिए, आज उसी धर्म के नाम पर हजारों कत्ल किये जा रहे हैं। यही वे लोग हैं जिन्होंने इस शब्द का मतलब ही बदल दिया और इसे बिल्कुल अलग रख दिया। जिस तरह से इन लोगों ने विज्ञान और धर्म को अलग-अलग किया और बाद में धर्म को भी बाँट दिया, हो सकता है कि आने वाले समय में ये लोग विज्ञान को भी खंडित कर दें। कहीं ऐसा न हो जाए कि पृथ्वी के किसी एक भाग के लोग कहें कि भौतिक विज्ञान (Physics) पर हमारा अधिकार है और दूसरे भाग के लोग कहें कि जीव विज्ञान (Biology) पर हमारा अधिकार है। वहीं तीसरे भाग के लोग कहीं रसायन विज्ञान ( Chemistry) पर अपना आधिपत्य न जमाने लगें। अब बताइये जरा यदि विज्ञान की ये तीनों शाखायें अलग-अलग हो जायें तो क्या आगे कोई खोज संभव हो पायेगी, क्या नये आविष्कार हो पायेंगें। नहीं हो पायेगें, क्योंकि हम जानते हैं कि ये तीनों विषय परस्पर एक दूसरे से जुड़े हुए हैं। ठीक उसी प्रकार धर्म और विज्ञान भी एक दूसरे से संबंधित हैं।
      
          विज्ञान के बारे में प्रारम्भिक ज्ञान हमें धर्म से प्राप्त हुआ है और धर्म का पुरा ज्ञान प्राप्त करने के लिए हमने विज्ञान का सहारा लिया है। जैसे हमें यदि कहीं पर खुदाई में कोई वस्तु प्राप्त होती है तो हम तकनीक का प्रयोग करके उस वस्तु के समय काल का पता लगाते हैं और फिर वहाँ की सभ्यता व संस्कृतियों का अनुमान लगाते हैं। वैसे ही धर्म विज्ञान को अपनी पुरानी पद्धतियों से परिचय कराता है ताकि वो किसी नए खोज या आविष्कार का आधार बन सकें। इस प्रकार हम कह सकते हैं कि धर्म और विज्ञान दोनों का ही लोग, समाज व  वहाँ की संस्कृतियों के विकास में बराबर का योगदान है और आगे भी हम इन दोनों की सहायता से ही विकास करेंगे और अनसुलझे रहस्यों को सुलझायेंगे।